Saturday, May 5, 2018

लाल किले का इतिहास | Red Fort History In Hindi

लाल किले का इतिहास

 Red Fort History In Hindi


Lal Kila – लाल किला 1857 तक तकरीबन 200 सालो तक मुगल साम्राज्य का निवास स्थान था। लाल किला / Red Fort दिल्ली में है। मुगल शासनकाल में लाल किला मुख्य किले के रूप में था, ब्रिटिशो के लगभग सभी कार्यक्रम लाल किले में ही होते थे।
लाल किले का निर्माण 1648 में पाँचवे मुगल साम्राज्य शाहजहाँ ने अपने महल के रूप में बनवाया था। लाल किला पूरी तरह से लाल पत्थरो का बना होने के कारण उसका नाम लाल किला पड़ा।
1546 में इस्लाम शाह सूरी द्वारा बनाये सलीमगढ़ किले की तरह ही लाल किले का भी निर्माण किया गया था। इस खुबसूरत किले में रंगमंच की कतारे बनी हुई है जो पानी के चैनल से जुडी हुई है और यह नहर-ए-बहिश्त कहा जाता है।
यह किला मुग़ल शासक शाहजहाँ के शासनकाल की रचनात्मकता का प्रतिनिधित्व करता है। मुस्लिम परंपराओ और प्रतिमानों के अनुसार ही इस किले का निर्माण किया गया था। लाल किले में हमें मुस्लिम महलो की प्रतिकृतिया दिखाई देती है, साथ भी लाल किले में हमें पर्शियन परंपराओ की छवि भी दिखाई देती है।
किले के बाहर एक मनमोहक गार्डन भी है लेकिन लाल किले में बना गार्डन हमें दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, कश्मीर, ब्रज और रोहिलखंड के गार्डन से थोडा अलग दिखाई देता है। सलीमगढ़ किले के साथ ही लाल किले को भी 2007 में यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट में शामिल किया गया था।
स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले के मुख्य द्वार पर तिरंगे को फहराते है और एक भाषण भी देते है।

दिल्ली के लाल किले का इतिहास | Red Fort History In Hindi

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शाह जहाँ ने 1638 में जब अपनी राजधानी को आगरा से दिल्ली स्थानांतरित करने का निर्णय लिया तभी लाल किले का निर्माण करवाया। वास्तविक रूप से देखा जाये तो सफ़ेद और लाल शाह जहाँ के पसंदीदा रंग है, लाल किले को आर्किटेक्ट उस्ताद अहमद लाहौरी ने ही डिजाईन किया था, और उन्होंने ने ही ताज महल का भी निर्माण किया था।
यह किला यमुना नदी के पास ही बना हुआ है, और इसी वजह से लाल किले की दीवारे और भी मनमोहक नज़र आती है। लाल किले का निर्माणकार्य 13 मई 1638 को शुरू हुआ था। और शाह जहाँ के नियंत्रण में इसका निर्माण कार्य 1648 में पूरा हुआ। दुसरे मुगल किलो की तरह ही इस किले की सीमा पर बनी दीवारे भी सलीमगढ़ किले की तरह असममित ढंग से बनी हुई है।
उस समय मनमोहक लाल किला बनने की वजह से दिल्ली को शाहजहानाबाद कहा जाता था। शाह जहाँ के शासन काल में लाल किला उनके शासनकाल की रचनात्मकता का प्रतिक माना जाता था। शाह जहाँ के बाद उनके उत्तराधिकारी औरंगजेब ने कृत्रिम मोतियों से बनी मस्जिद का भी निर्माण करवाया था, साथ ही औरंगजेब ने प्रवेश द्वार को और भी मनमोहक बनाने के लिये काफी कुछ बदलाव किये।
मुगल साम्राज्यों द्वारा किये गये किलो के निर्माण का औरंगजेब ने काफी पतन किया और 18 वी शताब्दी में मुगल शासनकाल में बने किलो और महलो को काफी क्षति भी पहोची। 1712 में जब जहंदर शाह ने लाल किले को हथिया लिया था तब तक़रीबन 30 सालो तक लाल किला बिना शासक के था।
लेकिन शासनकाल के लागु होने के एक साल पहले ही शाह जहाँ की हत्या हो गयी और उनकी जगह फर्रुख्सियर ने ले ली। अपने राज्य की आर्थिक स्थिति सुधरने के लिये चाँदी की छत को कॉपर की छत में बदला गया।
1719 में लाल किले को रंगीला के नाम से प्रसिद्ध मुहम्मद शाह ने अपनी कलाकृतियों से सजाया। 1739 में पर्शियन शासक नादिर शाह ने आसानी से मुगल सेना को परास्त किया। बाद में नादिर शाह तीन महीने बाद पर्शिया वापिस आये, लेकिन जाने से पहले उन्होंने मुगल शहरो को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था। इस तरह से मुगल शासको के आंतरिक रूप से कमजोर होने के कारण ही शाहजहानाबाद का नाम दिल्ली पड़ा और 1752 में उन्होंने मराठाओ के साथ दिल्ली की सुरक्षा का समझौता कर लिया।
1758 में मराठाओ ने लाहौर पर विजय हासिल की और पेशवा भी अहमद शाह दुर्रानी से संघर्ष करते नज़र आ रहे थे। 1760 में मराठाओ ने राजस्व बढ़ाने के लिये दीवान-ए-खास की चाँदी की छत को हटा दिया, क्योकि अहमद शाह दुर्रानी की सेना को परास्त करने के लिये उन्हें भारी राजस्व की जरुरत थी।
1761 में जब मराठा पानीपत की तीसरी लढाई में हार गए थे तब अहमद शाह दुर्रानी ने दिल्ली पर छापा मारा। 10 साल बाद शाह आलम ने मराठाओ की सहायता से दिल्ली के तख़्त को हासिल कर लिया।
1783 में सिख मिसल करोरिसिंघिया ने बघेल सिंह धालीवाल के साथ मिलकर दिल्ली और लाल किले को हासिल कर लिया। लेकिन बाद में सिख शाह आलम को शासक बनाने के लिये राज़ी हो गये और यह समझौता किया गया की मुगल दिल्ली में सिख गुरुओ के लिये सात गुरुद्वारों का निर्माण करेंगे।
1803 में एंग्लो-मराठा युद्ध के दौरान दिल्ली के युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने मराठा सेना को पराजित किया और लाल किले से मराठाओ के शासन को खत्म किया और ईस्ट इंडिया कंपनी ने लाल किले पर अपना नियंत्रण बनाया।
युद्ध के बाद ब्रिटिश ने लाल किले को अपने अधीन ले लिया और उसे ही अपना निवास स्थान घोषित कर दिया। अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह द्वितीय ने आखिर 1857 की क्रांति के दौरान किले को हासिल कर ही लिया।
लेकिन इतनी विशाल मुगल ताकत होने के बावजूद 1857 के समय मुगल ब्रिटिशो के खिलाफ लाल किले को नहीं बचा पाये। ब्रिटिशो के खिलाफ पराजित होने के बाद बहादुर शाह द्वितीय ने 17 सितम्बर को ही लाल किला छोड़ दिया। बाद में वे ब्रिटिशो के कैदी बने लेकिन 1858 में उन्हें जाँचा परखा गया और उसी साल 7 अक्टूबर को उन्हें रंगून भेजा गया।
मुगल शासन के खत्म होते ही शासन को ब्रिटिशो ने अपने हातो में ले लिया और मुगलों के सारे किलो को ब्रिटिशो ने हासिल कर लिया था। हासिल करने के बाद ब्रिटिशो ने किलो के फर्नीचर को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया और साथ ही किले के हरम, क्वार्टर और गार्डन को भी काफी क्षति पहोचाई और उनका भी विनाश किया।
मुगलों ने बनाये मार्बल के महल ही केवल ब्रिटिशो के अत्याचार से बचे रहे, इनको छोड़कर बाकी सभी मुगल सामग्री को ब्रिटिशो ने ध्वस्त कर दिया था। और किलो की अमूल्य और कीमती धातुओ को क्षति पहोचाकर उन्हें लूट कर ले गये। देखा जाये तो किलो के 2/3 आंतरिक भाग को ब्रिटिशो ने ध्वस्त कर दिया था और किले में केवल अब मनमोहक दीवारे ही बची हुई है।
लेकिन फिर 1899-1905 तक भारत राज करने वाले लार्ड कर्ज़न ने किलो की और किले की दीवारों की मरम्मत कराने का आदेश दिया। और साथ ही उन्होंने किलो में बने गार्डन को भी पानी देने का और उनमे सुधार करने का आदेश दिया।
1747 में नादिर शाह के हमला करने के बाद और 1857 में भारत का ब्रिटिशो के खिलाफ पराजित होने के बाद किले की ज्यादातर कीमती धातुओ को या तो लूट लिया गया था या तो वे चोरी चली गयी थी। कहा जाता है की ब्रिटिश शासको ने उन्हें प्राइवेट समूहों को बेंच दिया था और कुछ कीमती सामानों को ब्रिटिश म्यूजियम ले गये थे।
कहा जाता है की आज भी उनके कीमती सामान ब्रिटिश लाइब्रेरी और अल्बर्ट म्यूजियम में रखा गया है। उदाहरण कोहिनूर हीरा, शाह जहाँ का हरे रंग का शराब का कप और बहादुर शाह द्वितीय का ताज लन्दन में रखा गया है। भारतीयों द्वारा की गयी बहोत सिफ़ारिशो को ब्रिटिश सरकार ने कई बार अमान्य किया है।
1911 में ब्रिटिश किंग और क्वीन दिल्ली दरबार को देखने आये थे। उन्हें दीखने के लिये उस समय बहोत से महलो और किलो की मरम्मत भी की गयी थी। इसके बाद लाल किले के आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम को भी ड्रम हाउस से मुमताज़ महल में स्थानांतरित किया गया।
INA की सुनवाई में, जिसे लाल किले की सुनवाई भी कहा जाता है, उसमे भारतीय राष्ट्रिय आर्मी (INA) के बहोत से ऑफिसरो को दरबार और युद्ध संबंधी प्रशिक्षण दिया गया था। पहली बार यह प्रशिक्षण 1945 में लाल किले पर नवम्बर और दिसम्बर में लिया गया था।
15 अगस्त 1947 को भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरु ने लाहौर गेट पर भारतीय तिरंगा लहराया था। और तभी से हर स्वतंत्रता दिवस पर भारत के प्रधानमंत्री लाल किले पर तिरंगा फहराते है और भाषण भी देते है जिसे राष्ट्रिय तौर पर प्रसारित किया जाता है।
आज़ादी के बाद लाल किले में कई बदलाव किये गये और लाल किले का लगातार सैनिक प्रशिक्षण के लिये उपयोग किया जाने लगा। 22 दिसम्बर 2003 तक लाल किला सैनिको की निगरानी में था। 2009 में CCMP (Comprehensive Conservation and Management Plan) ने लाल किले को और ज्यादा मजबूत बनाने के लिये काफी निर्णय लिये।

लाल किले के बारे में कुछ रोचक बाते / Facts About Red Fort

1. लाल किला असल में सफ़ेद है। –
जी हां, इसे कहते तो लाल किला है लेकिन असल में यह लाल रंग का नही बना है। आर्कियोलॉजिकल के भारतीय सर्वे के अनुसार किले के कुछ भाग निम्बू (लाइम) पत्थरो से बने हुए है। लेकिन जब सफ़ेद पत्थर ख़राब होने लगे थे तब उन्हें ब्रिटिशो ने लाल रंग दिया था।
2. किले की सीमान्त दीवारों पर उसका नाम है। –
किले की ऊँची सीमान्त दीवारे होना मतलब किले की ज्यादा से ज्यादा सुरक्षित करना। जबसे लाल किले को लाल रंग दिया गया है तभी से ब्रिटिशो ने इसका नाम रेड फोर्ट रखा और स्थानिक लोगो ने इसका रूपांतर करके किले का नाम लाल किला रखा।
3. लाल किले को कभी किला-ए-मुबारक भी कहा जाता था। –
जैसा की हम सभी जानते है की वास्तविक रूप से Red Fort को किला-ए-मुबारक कहा जाता था। इस किले को तब बनाया गया था जब शाह जहाँ ने अपनी राजधानी आगरा को दिल्ली स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था।
4. लाल किले / Red Fort को बनाने में पुरे 10 साल लगे। –
हम सभी जानते है की उस समय में निर्माणकार्य करने के लिये पर्याप्त साधन और सुविधाये उपलब्ध नही थी। लेकिन उस समय के बेहतरीन आर्किटेक्ट उस्ताद हामिद और उस्ताद अहमद ने इसके निर्माण की शुरुवात 1638 में की थी और इसका निर्माणकार्य 1648 में पूरा हुआ था, मतलब इसे बनने में पुरे 10 साल लगे।
5. कोहिनूर हीरा इसके फर्नीचर का ही एक भाग है। –
कोहिनूर हीरा शाह जहाँ के ताज का ही एक भाग था। जो ठोस सोने से बना हुआ था और जिसपर बहुमूल्य धातुए लगी हुई थी, उस ताज को पहनकर शाह जहाँ अपने दीवान-ए-खास में बैठते थे, कहा जाता है की कोहिनूर हीरा विश्व का सबसे कीमती हीरा है।
6. Lal Kila के मुख्य प्रवेश द्वार को लाहौर गेट कहा जाता है। –
लाल किले के दो प्रवेश द्वार है – दिल्ली गेट और लाहौर गेट। शाह जहाँ के लाहौर के प्रति आकर्षण के कारण उसे लाहौर गेट का नाम दिया गया। क्योकि लोगो का सबसे ज्यादा आकर्षण भारत-पकिस्तान पर ही होता है।
7. किले में एक पानी का गेट भी है। –
किले में एक पानी का निकास द्वार भी है। वैसे देखा जाये तो वह एक नदी का तट ही है और नदी का नाम यमुना नदी है। इतने सालो में नदी में काफी बदलाव हुआ है लेकिन नदी का नाम नहीं बदला।
8. लाल किला अष्टकोणीय आकार में बना हुआ है। –
बर्ड ऑय व्यू (Bird Eye View) को ध्यान में रखते हुए Red Fort को भी अष्टकोणीय आकार में बनाया गया।
9. समुचित रूप से इसे रंग महल भी कहा जा सकता है। –
रंग महल – जिसका अर्थ रंगों के महल से है – असल में शासन की पत्नी और दासियों का निवास स्थान था। सम्राट काफी लकी था क्योकि वह खास महल के दाये में ही रहता था, ताकि वह आसानी से अपनी रानियों के साथ रात्रिभोज कर सके।
10. बहादुर शाह को उन्ही के Lal Kila में ब्रिटिशो ने बंदी बनाया था। –
ब्रिटिशो से परास्त होने के बाद बहादुर शाह को ब्रिटिशो ने उन्ही के महल में कैदी बना लिया था और दोषी पाए जाने के बाद उन्हें दीवान-ए-खास से निकलकर रंगून भेज दिया गया था।
11. पहले स्वतंत्रता दिवस से, हर साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री Red Fort पर ध्वज लहराकर भाषण देते है। –
हर साल स्वतंत्रता दिवस को भारत के प्रधानमंत्री Red Fort पर तिरंगा लहराकर भाषण भी देते है। और यह परंपरा तभी से चलती आ रही है।
12. ब्रिटिशो ने किले को अवस्त्र कर दिया था। –
मुगल शासन के ख़त्म होते ही ब्रिटिशो ने Lal Kila को काफी क्षति पहोचाई, और किले पर ब्रिटिशो का अधिकार हो गया था। ब्रिटिशो ने किले में स्थापित बहुमूल्य रत्नों और धातुओ की लूट की और फर्नीचर को भी ध्वस्त कर दिया। इसीलिये कहा जाता है की बहुमूल्य लाल किले को ब्रिटिशो ने अवस्त्र कर दिया था।
13. लाल किला आज एक वर्ल्ड हेरिटेज साईट है। –
2007 में यूनेस्को ने लाल किले के महत्त्व और इतिहास को देखते हुए उसे वर्ल्ड हेरिटेज साईट घोषित किया। यह भारत के लिये काफी गर्व की बात है।

फेसबुक के निर्माता मार्क जुकेरबर्ग | Mark Zuckerberg Story In Hindi

फेसबुक के निर्माता मार्क जुकेरबर्ग | Mark Zuckerberg Story In Hindi


आज फेसबुक को पूरी दुनिया जानती है। हर कोई फेसबुक यूज़ करता है। क्या आपको पता है? फेसबुक कैसे बनी और इसे किसने बनाया? चलो जानते है, फेसबुक के निर्माता Mark Zuckerberg – मार्क जुकेरबर्ग और इस लेख में हम पढ़ेंगे मार्क जुकेरबर्ग की प्रेरणादायक जीवन कहानी।

फेसबुक के मार्क जुकेरबर्ग की कहानी / Mark Zuckerberg Story In Hindi

मार्क इलियट जुकेरबर्ग एक अमेरिकन कंप्यूटर प्रोग्रामर, अमेरिकन उद्यमी और सामाजिक नेटवर्किंग साईट फेसबुक के सह-संस्थापक, अध्यक्ष है। दिसम्बर 2015 तक उनकी उनकी व्यक्तिगत संपत्ति तक़रीबन 46 बिलियन डॉलर बताई गयी है।
अपने कॉलेज रूममेट्स और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के सहकर्मी Eduardo Saverin, Andrew McCollum, Dustin Moskovitz और Chris Hughes के साथ मिलकर उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में ही फेसबुक की स्थापना की थी। बाद में उनके समूह ने फेसबुक को यूनिवर्सिटी के दुसरे लोगो तक भी पहोचाया। और धीरे-धीरे इसे ज्यादा से ज्यादा लोग पसंद करने लगे और 2012 तक फेसबुक का लगभग 1 बिलियन से भी ज्यादा लोग उपयोग करने लगे।
जुकेरबर्ग का समावेश बहुत से क़ानूनी विवादों में भी है। क्योकि उनके समूह के कुछ सहकर्मी कंपनी में उनके समावेश के अनुसार भागीदारी चाहते है।
दिसम्बर 2012 में, जुकेरबर्ग और उनकी पत्नी Priscilla Chan ने यह घोषणा की थी की वे अपनी संपत्ति का ज्यादा से ज्यादा भाग “मानवता और समानता को बढ़ाने” के लिए देंगे। 1 दिसम्बर 2015 को, उन्होंने यह घोषित किया था की वे अपने 99% फेसबुक शेयर (तक़रीबन एक समय में 45 बिलियन डॉलर) Chan Zuckerberg की अगुवाई में देंगे।
2010 से, टाइम्स पत्रिका ने मार्क जुकेरबर्ग के नाम को दुनिया के सबसे अमीर एवं प्रतिभावान 100 व्यक्तियों की सूचि में शामिल किया है। वही एक बार वे टाइम्स पत्रिका के “पर्सन ऑफ़ दी इयर” भी रह चुके है।

मार्क जुकेरबर्ग प्रारंभिक जीवनी / Mark Zuckerberg Biography

मार्क जुकेरबर्ग का जन्म 1984 में प्लेन्स, न्यू-यॉर्क में हुआ। वे डेंटिस्ट एडवर्ड जुकेरबर्ग और मनोचिकित्सक करेन केम्प्नेर के बेटे थे। वे और उनकी तीन बहने Randi, Donna और Arielle, न्यू-यॉर्क में ही बड़े हुए। जुकेरबर्ग यहूदी में बड़े हुए।
Ardsley हाई स्कूल में उन्होंने ग्रीक रोमनिय भाषा साहित्य का अध्ययन किया था। और बाद माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए उन्हें फिलिप्स एक्सेटर अकादमी, हैम्पशायर भेजा गया। जहा विज्ञान और साहित्यिक अभ्यास में उन्हें कई पुरस्कार भी मिले। एक कॉलेज पत्र में जुकेरबर्ग ने यह कहा था की वे अच्छी तरह से फ्रेंच, हिब्रू, लैटिन और प्राचीन ग्रीक पढ़ और लिख सकते है।
अकादमी में वे अपनी तलवार क्रीडा की टीम के कप्तान थे। हार्वर्ड कॉलेज में वे अपने विशेष व्याख्यानों के लिये जाने जाते थे। जिनमे कई कविताये भी शामिल है जैसे The Lliad.

मार्क जुकेरबर्ग का व्यक्तिगत जीवन / Personal Life Of Mark Zuckerberg

मार्क जुकेरबर्ग ने Priscilla Chan से शादी की उनके शादी के पहली story कुछ इस तरह थी,-
Priscilla Chan चाइनीज-वियतमान शरणार्थी की बेटी थी। जो 1975 में साइगॉन के गिरने के बाद यूनाइटेड स्टेट आये थे। Chan का जन्म Braintree, Massachusettes में हुआ था और सन 2003 में वह हाई स्कूल से ग्रेजुएट हुई थी।
सितम्बर 2010 में, जुकेरबर्ग ने Chan को आमंत्रित किया। और तभी से वह कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी की एक मेडिकल छात्रा बनी। बाद में वे दोनों पालो आल्टो के अपने किराये के मकान में रहने लगे थे। 19 मई 2012 को जुकेरबर्ग ने Chan से विवाह कर लिया था।
1 दिसम्बर 2015 को जुकेरबर्ग ने अपने पहले बच्चे के जन्म को घोषित किया। जिसका नाम मक्सिमा चन जुकेरबर्ग “मैक्स” है। जुकेरबर्ग और चन की पूर्वघोषना के अनुसार उन्होंने अपने 99% शेयर उसके नाम कर दिए थे।
मार्क जुकेरबर्ग, फेसबुक के सह-संस्थापक है और उन्होंने इस दुनिया को दोस्तों से और अपने रिश्तेदारों से जुड़े रहने का एक नया तरीका दिया है। साथ ही उनका नाम महान दानशुरो की यादी में भी आता है। अपने भाषण में भी उन्होंने कहा था की,
“मेरे जीवन की सबसे अद्भुत चीज यही है की फेसबुक के द्वारा दुनिया भर के लोगो को एक-दूजे से पहचान कराना।”

क़ुतुब मीनार का इतिहास और रोचक तथ्य | Qutub Minar History In Hindi


क़ुतुब मीनार का इतिहास और रोचक तथ्य 

| Qutub Minar History In Hindi



कुतुब मीनार, 120 मीटर ऊँची दुनिया की सबसे बड़ी ईंटो की मीनार है और मोहाली की फ़तेह बुर्ज के बाद भारत की दुसरी सबसे बड़ी मीनार है. प्राचीन काल से ही क़ुतुब मीनार का इतिहास चलता आ रहा है, कुतुब मीनार का आस-पास का परिसर कुतुब कॉम्पलेक्स से घिरा हुआ है, जो एक UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साईट भी है. कुतुब मीनार दिल्ली के मेहरुली भाग में स्थापित है. यह मीनार लाल पत्थर और मार्बल से बनी हुई है, कुतुब मीनार 72.5 मीटर (237.8 फ़ीट) ऊँची है जिसका डायमीटर 14.32 मीटर (47 फ़ीट) तल से और 2.75 मीटर (9 फ़ीट) चोटी से है. मीनार के अंदर गोल सीढ़ियाँ है, ऊँचाई तक कुल 379 सीढ़ियाँ है. क़ुतुब मीनार / Qutub Minar स्टेशन दिल्ली मेट्रो से सबसे करीबी स्टेशन है.Image result for qutub minar image


1200 AD में दिल्ली सल्तनत के संस्थापक क़ुतुब-उद-दिन ऐबक ने क़ुतुब मीनार का निर्माण शुरू किया. 1220 में ऐबक के उत्तराधिकारी और पोते इल्तुमिश ने क़ुतुब मीनार में तीन और मंजिल शामिल कर दी. 1369 में सबसे ऊँची मंजिल पर बिजली कड़की और इससे मंजिल पूरी तरह गिर गयी थी. इसीलिये फिरोज शाह तुग़लक़ ने फिर कुतुब मीनार के पुर्ननिर्माण का काम अपने करना शुरू किया और वे हर साल 2 नयी मंजिल बनाते थे, उन्होंने लाल पत्थर और मार्बल से मंजिलो का निर्माण कार्य शुरू किया था.
क़ुतुब मीनार ढेर सारी इतिहासिक धरोहरो से घिरा हुआ है, तो इतिहासिक रूप से क़ुतुब मीनार कॉम्पलेक्स से जुड़े हुए है. इसमें दिल्ली का आयरन पिल्लर, कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, अलाई दरवाजा, द टॉम्ब ऑफ़ इल्युमिश, अलाई मीनार, अला-उद-दिन मदरसा और इमाम ज़मीन टॉम्ब शामिल है. और भी दूसरी छोटी-मोटी इतिहासिक धरोहर शामिल है.

क़ुतुब मीनार का इतिहास – Qutub Minar History In Hindi

क़ुतुब मीनार का निर्माण कार्य क़ुतुब-उद-दिन ऐबक ने 1199 AD में शुरू किया था, जो उस समय दिल्ली सल्तनत के संस्थापक थे. कुतुब मीनार को पूरा करने के लिये उत्तराधिकारी ऐबक ने उसमे तीन और मीनारे बनवायी थी.
कुतुब मीनार के नाम को दिल्ली के सल्तनत कुतुब-उद-दिन ऐबक के नाम पर रखा गया है, और इसे बनाने वाला बख्तियार काकी एक सूफी संत था. कहा जाता है की कुतुब मीनार का आर्किटेक्चर तुर्की के आने से पहले भारत में ही बनाया गया था. लेकिन क़ुतुब मीनार के सम्बन्ध में इतिहास में हमें कोई भी दस्तावेज नही मिलता है. लेकिन कथित तथ्यों के अनुसार इसे राजपूत मीनारों से प्रेरीत होकर बनाया गया था. पारसी-अरेबिक और नागरी भाषाओ में भी हमें क़ुतुब मीनार के इतिहास के कुछ अंश दिखाई देते है. क़ुतुब मीनार के सम्बन्ध में जो भी इतिहासिक जानकारी उपलब्ध है वो फ़िरोज़ शाह तुगलक (1351-89) और सिकंदर लोदी (1489-1517) से मिली है.
कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद भी कुतुब मीनार के उत्तर में ही स्थापित है, जिसे क़ुतुब-उद-दिन ऐबक ने 1192 में बनवाया था. भारतीय उपमहाद्वीप की यह काफी प्राचीन मस्जिद मानी जाती है. लेकिन बाद में कुछ समय बाद इल्तुमिश (1210-35) और अला-उद-दिन ख़िलजी ने मस्जिद का विकास किया.
1368 AD में बिजली गिरने की वजह से मीनार की ऊपरी मंजिल क्षतिग्रस्त हो गयी थी और बाद में फ़िरोज़ शाह तुगलक ने इसका पुनर्निर्माण करवाया. इसके साथ ही फ़िरोज़ शाह ने सफ़ेद मार्बल से 2 और मंजिलो का निर्माण करवाया. 1505 में एक भूकंप की वजह से क़ुतुब मीनार को काफी क्षति पहोची और हुई क्षति को बाद में सिकंदर लोदी ने ठीक किया था. 1 अगस्त 1903 को एक और भूकंप आया, और फिर से क़ुतुब मीनार को क्षति पहोची, लेकिन फिर ब्रिटिश इंडियन आर्मी के मेजर रोबर्ट स्मिथ ने 1928 में उसको ठीक किया और साथ ही कुतुब मीनार के सबसे ऊपरी भाग पर एक गुम्बद भी बनवाया. लेकिन बाद में पकिस्तान के गवर्नल जनरल लार्ड हार्डिंग के कहने पर इस गुम्बद को हटा दिया गया और उसे क़ुतुब मीनार के पूर्व में लगाया गया था.
क़ुतुब मीनार की कुछ रोचक बाते – Interesting Facts About Qutub Minar
1. क़ुतुब मीनार को सबसे ऊँचे गुम्बद वाली मीनार माना जाता है, कुतुब मीनार की छठी मंजिल को 1848 में निचे ले लिया गया था लेकिन बाद में इसे कुतुब कॉम्पलेक्स में ही दो अलग-अलग जगहों पर स्थापित किया गया था. आज इसे बने 100 साल से भी ज्यादा का समय हो चूका है.
2. इल्तुमिश की न दिखाई देने वाली कब्र.
इल्तुमिश की कब्र के निचे भी एक रहस्य है, जो 1235 AD में बनी थी और वही इल्तुमिश की वास्तविक कब्र है. इस रहस्य को 1914 में खोजा गया था.
3. यदि एक मीनार बनना खत्म हो जाये तो वह क़ुतुब मीनार से भी बड़ी होगी.
अलाई मीनार (शुरुवात 1311 AD) यह मीनार क़ुतुब मीनार से भी ज्यादा ऊँची, बड़ी और विशाल है. 1316 AD में अला-उद-दिन ख़िलजी की मृत्यु हो गयी थी और तभी से अलाई मीनार का काम रुका हुआ है.
4. आज की नयी धरोहर तक़रीबन 500 साल पुरानी है.
इमाम ज़ामिन की कब्र दुसरे मुग़ल शासक हुमायूँ ने 1538 AD में बनवायी थी. और कुतुब मीनार कॉम्पलेक्स में यह सबसे नयी धरोहर है.
5. आप आज भी कुतुब मीनार की छठी मंजिल तक जा सकते हो ?
आज भी किसी को भी क़ुतुब मीनार की सबसे ऊपरी मंजिल पर नही जाने दिया जाता, लेकिन आज भी आप क़ुतुब मीनार की छठी मंजिल तक जा सकते हो.
शायद आप कंफ्यूज हो रहे हो? कुतुब मीनार के एक कोने में छठी मीनार है, जो आज भी 1848 लाल पत्थरो से बनी हुई है. लेकिन फिर थोड़ी ख़राब दिखने की वजह से उसे हटा दिया गया था.
6. एक जैसी धरोहर-
अलाई दरवाज़ा, यह क़ुतुब मीनार के उत्तरी भाग में है, जिसके दरवाजे हमे एक जैसे दिखाई देते है.
7. धुप घडी का सेंडरसन से कोई सम्बन्ध नही-
जिस इंसान ने क़ुतुब मीनार कॉम्पलेक्स बनवाया उसी की याद में वहा एक धुप घडी भी लगवायी गयी है.
8. 1910 तक क़ुतुब मीनार को एक रास्ते में था, यह दिल्ली-गुडगाँव रोड क़ुतुब मीनार के बींच से होकर गुजरता था. यह रास्ता इल्तुमिश की कब्र के दाये भाग में ही था.

बिहार के बारे में / ABOUT OF BIHAR IN HINDI

बिहार के बारे में / ABOUT OF BIHAR IN HINDI

बिहार का प्राचीन नाम ’विहार’ था, जिसका मतलब मठ होता है। यह भारत के पूर्वी भाग में स्थित है। क्षेत्रफल के हिसाब से बिहार भारत का बारहवां सबसे बड़ा और आबादी के मान से तीसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है। बंगाल के तिकोने क्षेत्र में पहुंचने से पहले गंगा नदी इस राज्य से बहती है जिसके कारण यह राज्य वनस्पति और जीव-जन्तुओं से समृद्ध है। बिहार का वन क्षेत्र भी विशाल है जो कि 6,764 वर्ग किमी है। यह राज्य भाषाई तौर पर प्रभावकारी है क्योंकि यहां कई भाषाएं बोली जाती हैं, जैसे भोजपुरी, मैथिली, मगही, बज्जिका और अंगिका। बिहार की राजधानी पटना है, जिसका नाम पहले पाटलीपुत्र था। भारत के कुछ महान राजाओं जैसे समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त मौर्य, विेक्रमादित्य और अशोक के शासन में बिहार शक्ति, संस्कृति और शिक्षा का केन्द्र बन गया। यहां उस समय के दो महान शिक्षा केन्द्र भी थे, विक्रमशिला और नालंदा विश्वविद्यालय। बिहार में आज भी यहां के 3,000 साल पुराने इतिहास की गवाही देते कई प्राचीन स्मारक मौजूद हैं और विश्वभर के लाखों पर्यटक इन्हें देखने आते हैं। राज्य में स्थित महाबोधि मंदिर को यूनेस्को द्वारा विरासत स्थल घोषित किया गया है।

बिहार का इतिहास


प्राचीन बिहार जिसका नाम मगध था ने, 1,000 सालों तक सत्ता, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभाई। मौर्य नाम का पहला भारतीय साम्राज्य 352 ईस्वी में मगध में ही शुरु हुआ और उसकी राजधानी पाटलीपुत्र यानी आज का पटना थी। 240 ईस्वी में मगध में गुप्त साम्राज्य आया। गुप्त के नेतृत्व में भारत ने विश्व अर्थव्यवस्था पर प्रभुत्व हासिल किया। बिहार के सासाराम के महान पश्तून शासक शेर शाह सूरी ने सन् 1540 में उत्तर भारत की बागडोर संभाली। वह मुगलकाल के सबसे प्रगतिशील शासकों में से एक थे और उनके शासन में बिहार खूब फलाफूला। मुगलों के पतन के बाद बिहार बंगाल के नवाबों के नियंत्रण में आ गया।

बिहार का भूगोल


बिहार की स्थिति ठीक 24ह्-20´ और 27ह्-31’ उत्तरी अक्षांश के बीच और 82ह्-19’ और 88ह्-17’ पूर्व देशांतर है। इस हिसाब से बिहार भारत के उत्तर पूर्वी भाग में स्थित है। बिहार चारों ओर से जमीन से घिरा राज्य है, यह पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश, उत्तर में नेपाल और दक्षिण में झारखंड राज्य से घिरा है। बिहार की मिट्टी स्वाभाविक तौर पर उपजाउ है और इसकी यह विशेषताएं भारतीय-गंगा समतल क्षेत्र की गंगा जलोड़ मिट्टी के कारण हैं, पश्चिम चंपारण में दलदली मिट्टी और उत्तरी बिहार में तैराई मिट्टी मिलती है। गंगा और उसकी सहायक नदियां बिहार में पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं। बिहार के उत्तर में हिमालय पर्वत है जो वास्तव में नेपाल से शुरु होता है और इसके दक्षिण में कैमूर पठार और छोटानागपुर पठार है। 

बिहार की सरकार और राजनीति


आजादी के बाद से बिहार की सामाजिक, आर्थिक स्थिति में गिरावट का दौर रहा जिस वजह से यह देश के पिछड़े राज्यों में गिना जाने लगा। बिहार की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियां हैं, एनडीए जिसमें भाजपा, जनता दल शामिल हैं और राष्ट्रीय जनता दल की अगुवाई वाला गठबंधन। बेहतर प्रशासन हेतु बिहार को नौ संभागों और 38 जिलों में बांटा गया है। आजादी के बाद आपातकाल के दौरान बिहार ने जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चुनाव कराकर देश को बता दिया कि वह तानाशाही की जगह लोकतंत्र को चुनने में विश्वास रखता है। बिहार में सन् 1990 में जनता दल सत्ता में आया और लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री बने। हालांकि वह भी बिहार का विकास करने में विफल रहे और भ्रष्टाचार बढ़ने पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बना दिया। यह वह वक्त था जब बिहार ने सारे सामाजिक पहलुओं में गिरावट देखी। 

बिहार में शिक्षा


विकास के लिए शिक्षित दिमाग की आवश्यकता होती है, इसलिए शिक्षा किसी भी देश या राज्य की वर्तमान परिदृश्य को दर्शाती है। बिहार इस क्षेत्र में आगे तो बढ़ रहा है लेकिन यह अभी भी बस एक शुरुआत से ज्यादा कुछ नहीं है। आधुनिक बिहार में शिक्षा के बुनियादी ढांचे की बहुत कमी है जो मांग और आपूर्ति के बीच बहुत अंतर पैदा करती है। बिहार में शिक्षक अनुपस्थिति दर 37.8 प्रतिशत है और इसका शिक्षक-छात्र अनुपात और छात्र-कक्षा अनुपात सबसे अधिक है। बिहार में लगभग 10 प्रतिशत प्राथमिक स्कूलों में पीने हेतु साफ पानी भी नहीं है। 

बिहार की ’आउट आॅफ स्कूल’ दर भी बहुत प्रभावशाली नहीं है। हालांकि धीरे-धीरे ही सही लेकिन स्थिति बेहतर हो रही है। आउट आॅफ स्कूल दर जो कि सन् 2006 में 12.8 प्रतिशत थी सन् 2007 में गिरकर 6.3 प्रतिशत हो गई। ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित निजी मिशनरी स्कूलों और मुस्लिम मौलवियों के मदरसों के अलावा बिहार में कई केन्द्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय स्कूल हैं। राज्य के ज्यादातर स्कूल बिहार विद्यालय परीक्षा मंडल के अंतर्गत आते हैं।

अर्थव्यवस्था


आजादी के बाद से बिहार की अर्थव्यवस्था कभी इतनी अच्छी नहीं रही जितनी आज है। नीतीश कुमार की सरकार ने ’न्याय के साथ विकास‘ को अपना मोटो बनाया जिससे बिहार की अर्थव्यवस्था में खासा सुधार हुआ। इसे एनडीटीवी ने ‘शांत बदलाव’ का नाम दिया। सन् 2007-08 में बिहार की प्रति व्यक्ति आय 11,615 रुपये थी। हालांकि सन् 2011-12 में यह बढ़कर 42.07 प्रतिशत हो गई। इसलिए अब भारत और बिहार की प्रति व्यक्ति आय के बीच के अंतर को खत्म करने के लिए समान वृद्धि दर बनाए रखनी होगी। बिहार की कम प्रति व्यक्ति आय की समस्या इसके विभिन्न जिलों में प्रति व्यक्ति आय की असमानता से और बढ़ी है। 

बिहार की संस्कृति


बिहार गौतम बुद्ध और भगवान महावीर की जन्मभूमि है। इसलिए आज की बिहार की संस्कृति एक महान ऐतिहासिक अतीत की विरासत है। दीवाली के अलावा कुछ ऐसे त्यौहार हैं जो सिर्फ बिहार में ही मनाए जाते हैं। ऐसा एक त्यौहार छठ पूजा है। यहां सूर्य देवता की पूजा बहुत श्रद्धा से की जाती है। सर्दियों के महीनों में मिथिला में समा चाकेवा उत्साह से मनाया जाता है, जब हिमालय पर्वत से प्रवासी पक्षी इस क्षेत्र में आते हैं। बिहार का एक और लोकप्रिय त्यौहार मकर संक्राति है। राज्य में कई लोक गीत और नृत्य हैं जो विशेष अवसरों पर प्रदर्शित किये जाते हैं। बच्चे के जन्म के समय ‘सोहर’ गाया जाता है, शादी के वक्त ‘सुमंगली’ गाते हैं, पहले धान को बोते समय ‘कटनीगीत’ गाया जाता है और फसल की कटाई के दौरान ‘रोपनीगीत’ गाते हैं। बिहार की कुछ प्रसिद्ध लोक नृत्य शैलियां गोंड नाच, धोबी नाच, झूमर नाच, जितिया नाच आदि हैं।

बिहार की भाषाएं


बिहारी नाम बिहार और उसके पड़ोसी राज्यों में बोली जाने वाली विभिन्न भाषाओं का पर्यायवाची है। मैथिली, मगही, बज्जिका, भोजपुरी और अंगिका बिहार की प्रचलित भाषाएं है। इस तथ्य के बावजूद कि यह सभी भाषाएं बिहार में व्यापक तौर पर बोली जाती हैं, मैथिली को छोड़ कर किसी और भाषा को संवैधानिक मान्यता नहीं मिली। हिन्दी बिहार की प्रमुख भाषा है, शिक्षा और सरकारी मामलों में हिन्दी और उर्दू का उपयोग होता है। मगही भाषा का नाम मगधी प्राकृत से बना जो कि मौर्य साम्राज्य की आधिकारिक भाषा थी और भगवान बुद्ध भी इसे बोलते थे। मगही देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। यह बिहार के आठ जिलों और झारखंड के तीन जिलों में बोली जाती है। भोजपुरी बिहार की बहुत लोकप्रिय भाषा है यह भारत की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है।

बिहार का परिवहन


बिहार का परिवहन नेटवर्क बहुत विशाल है और देश के बाकी हिस्सों से इसे जोड़े रखता है। बिहार में कुल 29 राष्ट्रीय राजमार्ग और कई राज्य राजमार्ग हैं, जो कि क्रमशः 2,910 किमी और 3,766 किमी लंबे हैं। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम कई डीलक्स और लक्ज़री बसें चलाता है जो लोगों को बिहार के मुख्य शहरों में लाती और ले जाती हैं। हाल ही में बिहार में ईज़ीकेब की तरह कार रेंटल सेवा भी शुरु हुई है। बिहार का रेल तंत्र राज्य को प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से जोड़ता है। बिहार के अच्छी तरह जुड़े रेलवे स्टेशनों में पटना, मुजफ्फरनगर, दरभंगा, गया, कैथर, छपरा, बरौनी और भागलपुर हैं। 

बिहार के जिले


क्र.सं.जिला का नामजिला मुख्यालयजनसंख्या (2011)विकास दरलिंग अनुपातसाक्षरताक्षेत्र (वर्ग किमी)घनत्व (/ वर्ग किमी)
1अररियाअररिया281156930.25%92153.532829992
2अरवलअरवल70084318.89%92867.4348391099
3औरंगाबादऔरंगाबाद254007326.18%92670.323303760
4बांकाबांका203476326.48%90758.173018672
5बेगूसरायबेगूसराय297054126.44%89563.8719171540
6भागलपुरभागलपुर303776625.36%88063.1425691180
7भोजपुरArrah272840721.63%90770.4724731136
8बक्सरबक्सर170635221.67%92270.1416241003
9दरभंगादरभंगा393738519.47%91156.5622781721
10गयागया439141826.43%93763.674978880
11गोपालगंजगोपालगंज256201219.02%102165.4720331258
12जमुईजमुई176040525.85%92259.793099567
13जहानाबादजहानाबाद112531321.68%92266.815691206
14कैमूरभबुआ162638426.17%92069.343363488
15कटिहारकटिहार307102928.35%91952.2430561004
16खगरियाखगरिया166688630.19%88657.9214861115
17किशनगंजकिशनगंज169040030.40%95055.461884898
18लखीसरायलखीसराय100091224.77%90262.421229815
19मधेपुरामधेपुरा200176231.12%91152.2517871116
20मधुबनीमधुबनी448737925.51%92658.6235011279
21मुंगेरमुंगेर136776520.21%87670.461419958
22मुजफ्फरपुरमुजफ्फरपुर480106228.14%90063.4331731506
23नालंदाबिहार शरीफ287765321.39%92264.4323541220
24नवादानवादा221914622.63%93959.762492889
25पश्चिम चंपारणबेतिया393504229.29%90955.75229753
26पटनापटना583846523.73%89770.6832021803
27पूर्व चंपारणमोतिहारी509937129.43%90255.7939691281
28पूर्णियापूर्णिया326461928.33%92151.0832281014
29रोहताससासाराम295991820.78%91873.373850763
30सहरसासहरसा190066126.02%90653.217021125
31समस्तीपुरसमस्तीपुर426156625.53%91161.8629051465
32सरनछपरा395186221.64%95465.9626411493
33शेखपुराशेखपुरा63634221.09%93063.86689922
34शिवहरशिवहर65624627.19%89353.784431882
35सीतामढ़ीसीतामढ़ी342357427.62%89952.0521991491
36सिवानसिवान333046422.70%98869.4522191495
37सुपौलसुपौल222907628.66%92957.672410919
38वैशालीहाजीपुर349502128.57%89566.620361717


बिहार के महत्वपूर्ण तथ्य 

 
राज्यपालआर एन कोविद
मुख्यमंत्रीनितेश कुमार
आधिकारिक वेबसाइटwww.gov.bih.nic.in
स्थापना का दिन1912 बिहार के रूप में, (उड़ीसा प्रांत – बिहार), 26 जनवरी 1950
क्षेत्रफल94,163 वर्ग किमी
घनत्व1,102 प्रति वर्ग किमी
जनसंख्या (2011)104,099,452
पुरुषों की जनसंख्या (2011)54,278,157
महिलाओं की जनसंख्या (2011)49,821,295
जिले38
राजधानीपटना
नदियाँकोसी, गंगा, सरयू, गंडक, कमला, पनर, सौरा, पुनपुन
वन एवं राष्ट्रीय उद्यानवाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान, राजगीर अभयारण्य, भीमबांध अभयारण्य, गौतम बुद्ध अभयारण्य, उदयपुर अभयारण्य
भाषाएँहिंदी, भोजपुरी, मैथिली, अंगिका, मगही
पड़ोसी राज्यझारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल
राजकीय पशुबैल
राजकीय पक्षीगौरैया
राजकीय वृक्षपीपल
राजकीय फूलगेंदा
नेट राज्य घरेलू उत्पाद (2011)20708
साक्षरता दर (2011)63.82%
1000 पुरुषों पर महिलायें916
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र243
संसदीय निर्वाचन क्षेत्र40

उत्तर प्रदेश के बारे में / ABOUT OF UTTAR PRADESH IN HINDI

उत्तर प्रदेश के बारे में/ ABOUT OF UTTAR PRADESH
 
उत्तर प्रदेश शब्द का वास्तव में अर्थ ‘उत्तरी प्रांत’ है और यह भारत के उत्तरी भाग में स्थित है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है, कानपुर इसकी औद्योगिक और आर्थिक राजधानी है। 

उत्तर प्रदेश राज्य पड़ोसी देश नेपाल और उत्तर में उत्तराखंड राज्य से घिरा है। यह उत्तर-पश्चिम में दिल्ली और हरियाणा से, पश्चिम में राजस्थान से, दक्षिण-पश्चिम में मध्य प्रदेश से, पूर्व में बिहार और दक्षिण-पूर्व में झारखंड से घिरा है। 

यह राज्य 2,40,928 वर्ग किलोमीटर में विस्तारित है और इसमें 75 जिले हैं। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार यहां 19,98,12,341 से ज्यादा लोग रहते हैं और यह देश का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला राज्य है। उत्तर प्रदेश में कई ऐतिहासिक, धार्मिक, प्राकृतिक और मानव निर्मित पर्यटन स्थल हैं, जैसे ताजमहल, कौशाम्बी, वाराणसी, कुशीनगर, चित्रकूट, लखनउ, झांसी, मेरठ, इलाहाबाद और मथुरा आदि।

उत्तर प्रदेश का पुराना नाम

 प्राचीन काल से ही उत्तर प्रदेश एक महत्वपूर्ण राज्य रहा है, इसका कारन है यहाँ की नदियों द्वारा सिंचित भूमि, सर्वप्रथम इस राज्य को मध्य प्रान्त के नाम से जाना जाता था, फिर इस प्रान्त में अनेक राजवंसो का उदय हुआ और ये विभाजित हो गया, १९४७ से पूर्व तक इसको संयुक्त प्रान्त के नाम से जाना जाता था जिसमे अवध प्रान्त और ब्रज प्रान्त संयुक्त रूप से था। 

उत्तरी प्रदेश का इतिहास

 
उत्तर प्रदेश में समृद्ध ऐतिहासिक विरासत है जिसका आज के उत्तर प्रदेश को परिभाषित करने में महत्वपूर्ण योगदान है। उत्तर प्रदेश का इतिहास आर्य काल तक पुराना है जब आर्यों ने आकर देश के मध्य में बस्तियों की स्थापना की। उस समय वे इसे ‘मध्यदेश’ कहते थे। इतिहास में यहां कई राजवंशों का शासन रहा। 1 सहस्त्राब्दी के मध्य के आसपास यहां भगवान बुद्ध का आगमन हुआ, जिन्होंने बौद्ध धर्म का प्रचार किया। भगवान बुद्ध ने अपना पहला धर्मोपदेश उत्तर प्रदेश के सारनाथ में दिया, जो कि वाराणसी जिले में स्थित है। उस समय इस क्षेत्र पर मगध का राज था। इसके बाद नंदा राजवंश और फिर मौर्य का शासन यहां आया।

इस राज्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बहुत हद तक मुस्लिम शासन की शुरुआत से जुड़ी है। इस समय में राजपूतों की हार देखी गई। मुगल शासन के दौरान, खासकर अकबर के शासन काल में इस राज्य की समृिद्ध अपने उत्कर्ष पर थी। मुगल शासन के दौरान ही राज्य में कुछ ऐतिहासिक स्मारकों का निर्माण हुआ जिनका नाम हमेशा इतिहास में दर्ज रहेगा। 

जैसे जैसे समय बीतता गया, उत्तर प्रदेश में मुगल शासन का पतन हुआ और ब्रिटिश शासन की शुरुआत हुई। मुगलों का प्रभाव सिर्फ दोआब क्षेत्र तक ही सीमित रह गया। सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उत्तर प्रदेश राज्य की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी। उत्तर प्रदेश में कई राजवंशों का राज रहा जिनमें शामिल हैं:
  • नंदा
  • मौर्य
  • राष्ट्रकूट
  • मगध
  • गुप्त
  • गुर्जर
  • शुंग
  • कुषाण
  • पाल राज्य
  • मुगल

उत्तर प्रदेश का भूगोल और मौसम

 
उत्तर प्रदेश राज्य का कुल क्षेत्र 2,40,928 वर्ग किलोमीटर में फैला है और यह भारत के उत्तरी भाग में स्थित है। यह राज्य अपनी अंतर्राष्ट्रीय सीमा नेपाल से साझा करता है। राज्य का ज्यादातर क्षेत्र मैदानी है और हिमालय राज्य के उत्तरी भाग में स्थित है। उत्तर प्रदेश को तीन भागों में बांटा जा सकता है जिसमें पहला उत्तर में हिमालय क्षेत्र है। यह बहुत बीहड़ और विविध क्षेत्र है। इसकी टोपोग्राफी 300 मीटर से 5000 मीटर की उंचाई तक पहुंचते पहुंचते भिन्न होती जाती है। दूसरा भाग मध्य में स्थित गंगा के मैदानी इलाके हैं। यह बहुुत उपजाउ जलोढ़ मिट्टी वाला क्षेत्र है और इसका लैंडस्केप सपाट है। यहां कई झीलें और नदियां आदि हैं। तीसरा भाग दक्षिण में विंध्य पर्वत और पठार का है। इसमें कई सख्त चट्टानों की परत है और मैदानों, पहाड़ों, घाटियों और पठार की विविध टोपोग्राफी है। इस क्षेत्र में पानी सीमित है। यह राज्य भारत के जिन राज्यों से अपनी सीमा साझा करता है वह हैं:
  • हिमाचल प्रदेश
  • हरियाणा
  • झारखंड
  • उत्तराखंड
  • मध्य प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • दिल्ली
  • राजस्थान
  • बिहार

उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियां यमुना, गंगा, घाघरा और सरयू हैं। कृषि के महत्व के अलावा इन नदियों का धार्मिक महत्व भी बहुत है। इस क्षेत्र का मौसम मुख्यतः सबट्राॅपिकल विशेषता वाला है। इसमें चार प्रकार के मौसम और नम संतुलित मौसम होता है। 

उत्तर प्रदेश में ट्राॅपिकल मानसून प्रकार की जलवायु है जिसमें उंचाई के साथ बदलाव आते हैं। हिमालय क्षेत्र बहुत ठंडा है और मैदानी इलाकों में मौसम के साथ साथ तापमान में परिवर्तन आता है। राज्य में तीन अलग मौसम होते हैं। सर्दियां अक्टूबर से फरवरी, गर्मियां मार्च से मध्य जून और बरसात का मौसम जून से सितंबर का होता है। 

मैदानी इलाकों में पूर्व में सबसे ज्यादा बरसात होती है और बाढ़ यहां की बार-बार आने वाली एक समस्या है। बाढ़ से फसलों, संपत्ति और जीवन को बहुत नुकसान होता है। गर्मियां सूखी और गर्म होती हैं जिसमें औसत 45 डिग्री तापमान के साथ धूल भरी हवाएं भी होती हैं। सालाना बरसात औसत तौर पर 990 मिमी. होती है जिसमें से 85 प्रतिशत मानसून में होती है। बरसात के दिनों में तापमान में थोड़ी कमी आती है। सर्दियां बहुत ठंडी होती हैं जिसमें पारा 4 डिग्री तक गिर जाता है और कोहरे से राज्य के कई इलाकों में हालात पर असर पड़ता है। 

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था

 
अर्थव्यवस्था के हिसाब से उत्तर प्रदेश भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। राज्य की अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े भाग कृषि और सेवा क्षेत्र हैं। सेवा क्षेत्रों में यात्रा, पर्यटन और होटल उद्योग, रियल एस्टेट, वित्तीय और बीमा परामर्शी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश का प्रमुख व्यवसाय कृषि है। गेंहू मुख्य फसल और गन्ना मुख्य वाणिज्यिक फसल है। देश का लगभग 70 प्रतिशत गन्ना उत्तर प्रदेश से आता है। राज्य में स्थानीय और बड़े उद्योग हैं जो स्टील, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रानिक, चमड़े, केबल, इंजीनियरिंग उत्पाद, आॅटोमोबाइल, रेलवे कोच और वेगन, विद्युत उपकरण आदि का निर्माण करते हैं। राज्य में कई लघु उद्योग इकाइयां भी हैं। उत्तर प्रदेश साॅफ्टवेयर और इलेक्ट्राॅनिक के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी आकर्षित कर रहा है। लखनउ और नोएडा सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग का हब भी बनते जा रहे हैं। 

उत्तर प्रदेश की जनसांख्यिकी

 
उत्तर प्रदेश राज्य में 199.8 मिलीयन लोग हैं जो इसे आबादी के मामले में देश का सबसे बड़ा राज्य बनाते हैं। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की जनसंख्या में विभिन्न समुदायों की स्थिति इस प्रकार हैः
  1. हिंदू लगभग 80 प्रतिशत हैं
  2. मुस्लिम लगभग 18 प्रतिशत हैं
  3. अन्य समुदायों में बौद्ध, सिख, जैन और ईसाई हैं।

उत्तर प्रदेश में सरकार और राजनीति

 
उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा संख्या में सदस्य संसद में जाते हैं। भारतीय संसद में लोक सभा में इस राज्य की 80 सीटें और राज्य सभा में 31 सीटें हैं। इस राज्य ने देश को आठ प्रधान मंत्री दिए हैं। 

उत्तर प्रदेश की सरकार भारत की एक द्विसदनीय विधायिका है। यह एक लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित निकाय है जिसका प्रमुख राज्यपाल होता है। राज्यपाल का कार्यकाल पांच साल का होता है। राज्यपाल राज्य का औपचारिक प्रमुख होता है जो मुख्यमंत्री और मंत्रियों की परिषद को नियुक्त करता है। हालांकि राज्यपाल राज्य का प्रमुख होता है लेकिन राज्य के दिन-प्रतिदिन के कामकाज का प्रबंधन मुख्यमंत्री और मंत्री परिषद द्वारा किया जाता है। मंत्रियों की परिषद में राज्य मंत्री, केबिनेट मंत्री और उप मंत्री शामिल होते है। मंत्रियों की परिषद का सहायक राज्यपाल का सचिव होता है जो कि सचिवालय का प्रमुख होता है। 

समाज और संस्कृति

 
राज्य की संस्कृति और समाज की जड़ें यहां की परंपरा, साहित्य, कला और इतिहास की जड़ों में हैं। उत्तर प्रदेश की संस्कृति बहुरंगी है और समय के साथ यह बहुत समृद्ध हुई है। इसे सांस्कृतिक विविधता का वरदान प्राप्त है। राज्य में अनेक धार्मिक स्थल और तीर्थ स्थान हैं जहां कई श्रद्धालु जाते हैं। इस राज्य से बहने वाली दो पवित्र नदियों गंगा और यमुना का वर्णन भारतीय पुराणों में भी है। 

उत्तर प्रदेश भारत के शीर्ष पर्यटन स्थलों में से एक है। आगरा शहर में विश्व के सात अजूबों में से एक अजूबा ताजमहल है। वाराणसी को विश्व के सबसे पुराने शहरों में से एक माना जाता है। उत्तर प्रदेश में कुंभ मेले का आयोजन होता है जिसमें एक करोड़ से ज्यादा हिंदू श्रद्धालु पवित्र नदी में स्नान करते हैं। इसे दुनिया में मानवों का सबसे बड़ा धार्मिक सम्मेलन माना जाता है। 

राज्य में एक प्राचीन नृत्य और संगीत परंपरा है। कथक एक शास्त्रीय नृत्य रुप है जो यहां निखरा और बढ़ा है। रसिया गीत भी यहां की लोक विरासत में हैं जो राधा और कृष्ण के दिव्य प्रेम को दर्शाते हैं। कुछ अन्य लोक नृत्य और नाटक की शैलियों में रासलीला, रामलीला, नौटंकी, ख्याल, कव्वाली आदि हैं। 

धार्मिक प्रथाएं और त्यौहार राज्य के समाज और संस्कृति का अभिन्न अंग हैं, ठीक वैसे ही जैसे वो भारत में अन्य स्थानों पर हैं। जाति और धर्म से परे यहां कई त्यौहार मनाए जाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहारों में दीपावली, होली, दशहरा, नवरात्र, ईद, महावीर जयंती और बुद्ध जयंती हैं। 

भाषाएं

 
उत्तर प्रदेश में वैदिक साहित्य के कई ग्रंथ और भजनों की रचना की हुई है। इन ग्रंथों में संस्कृत साहित्य की सबसे पुरानी कृतियां और हिंदू धर्म के प्राचीन शास्त्र शामिल हैं। इस राज्य को कई बार ‘भारत की हिंदू पट्टी’ भी कहा जाता है। हिंदी सन् 1951 के भाषा अधिनियम के तहत आधिकारिक भाषा बनी। सन् 1989 मेें इस अधिनियम में बदलाव करके उर्दू को उत्तर प्रदेश की अन्य मूल भाषा बनाया गया। यहां की पांच प्रमुख मूल भाषाएं अवधी, ब्रज भाषा, बुन्देली, कन्नौजी और खड़ी बोली हैं। 

उत्तर प्रदेश में मेले और त्यौहार

 
बाराबंकी से 10 किलोमीटर दूर देवा में हर साल हाजी वारिस अली शाह के पवित्र स्थल पर देव मेला आयोजित होता है। अक्टूबर और नवंबर के महीने में बाराबंकी में आयोजित होने वाला यह देव मेला उत्तर प्रदेश और भारत के सांप्रदायिक सद्भाव को दर्शाता है। यहां खेल, संगीत, कवि सम्मेलन और खरीददारी के कई बड़े अवसर होते हैं। यह मुख्यतः एक धार्मिक मेला है जिसमें भारत, पाकिस्तान और मध्य पूर्व के भागों से श्रद्धालु आते हैं। यह मुख्य रुप से मुस्लिम धार्मिक अवसर है। उर्स या सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की याद में भारत भर से मुस्लिम यहां आते हैं। उत्तर प्रदेश के अन्य मशहूर त्यौहार हैं:
  • होली                                                         
  •  मुहर्रम
  • छठ पूजा
  • दीपावली
  • बुद्ध जयंती
  • राम नवमीं
  • दशहरा
  • महावीर जयंती
  • कृष्ण जन्माष्टमी
  • ईद
  • गुरु नानक जयंती
  • महाशिवरात्री
  • बारह वफत
  • क्रिसमस
  • बकरीद

उत्तर प्रदेश में शिक्षा

 
उत्तर प्रदेश में विश्व के कुछ सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान हैं। भारत के अन्य विकसित राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश ने भी देश में शिक्षा के क्षेत्र मेें बहुत योगदान दिया है। पिछले कुछ सालों में राज्य सरकार ने शिक्षा में विभिन्न स्तरों पर बहुत निवेश किया है। सरकार ने राज्य में शिक्षा के परिदृश्य में सुधार के लिए निजी क्षेत्र के योगदान को भी स्वीकारा है और उसकी सराहना भी की है। 

उत्तर प्रदेश में पर्यटन

 
उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थलों की अगर बात करें तो हिमालय की संुदर तलहटियों के बारे में बहुत कुछ कहा जा सकता है। खूबसूरत लैंडस्केप में स्थित हिमालय के पर्यटन स्थल सैलानियों के पसंदीदा स्थान हैं। अपनी समृद्ध और विविध टोपोग्राफी, जीवंत संस्कृति, त्यौहारों, स्मारकों और प्राचीन धार्मिक जगहों के कारण उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटकों के मामले में 71 मिलीयन से ज्यादा के सालाना आंकड़े के साथ पहले स्थान पर है। राज्य में कुछ मशहूर रुचिकर स्थानों में हैं: मंदिरों का शहर वाराणसी, आगरा - विश्व के सात अजूबों में से एक ताजमहल के लिए प्रसिद्ध, इलाहाबाद - कुंभ मेले के लिए मशहूर, कानपुर - उत्तर प्रदेश का व्यवसायिक और वाणिज्यिक हब, लखनउ - उत्तर प्रदेश की राजधानी, मथुरा, वृंदावन, अयोध्या, झांसी, सारनाथ - जहां गौतम बुद्ध ने धर्म पर पहला उपदेश दिया था, कुशीनगर - माना जाता है कि गौतम बुद्ध ने मृत्यु के बाद यहां निर्वाण पाया था, मेरठ, मिर्जापुर, गाजियाबाद, गोरखपुर, नोएडा और ग्रेटर नोएडा - आईटी, इलेक्ट्रिॅानिक और शिक्षा हब, आदि। 

उत्तर प्रदेश के शीर्ष पर्यटक आकर्षण हैं:
  • ताजमहल
  • आगरा का किला
  • अयोध्या
  • कुशीनगर
  • वृंदावन
  • सारनाथ
  • फतेहपुर सीकरी
  • मथुरा
  • लखनउ
  • वाराणसी
  • बदायूं
  • गाजीपुर
  • इलाहाबाद
  • आगरा

उत्तर प्रदेश में परिवहन

 
उत्तर प्रदेश में परिवहन के विभिन्न साधनों द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। राज्य में दो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं - वाराणसी का लाल बहाहुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और लखनउ का चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट। इसके अलावा राज्य में चार घरेलू हवाई अड्डे भी हैं। उत्तर प्रदेश में देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। गोरखपुर और इलाहाबाद पूर्वोत्तर रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे के मुख्यालय हैं। बहुत बड़े सड़क नेटवर्क के कारण यह राज्य देश में नौ पड़ोसी राज्यों से भी जुड़ा है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम राज्य के भीतर और आस पास के राज्यों में अपनी सेवाएं संचालित करता है। 

उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण तथ्य

राज्यपालराम नाईक
मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथ (भारतीय जनता पार्टी)
आधिकारिक वेबसाइटup.gov.in
स्थापना का दिनजनवरी 1950
क्षेत्रफल240,928 वर्ग किमी
घनत्व828 प्रति वर्ग किमी
जनसंख्या (2011)199,812,341
पुरुषों की जनसंख्या (2011)104,480,510
महिलाओं की जनसंख्या (2011)95,331,831
जिले75
राजधानीलखनऊ
धर्महिंदू, इस्लाम, ईसाई, बौद्ध, जैन
नदियाँगंगा, यमुना, सरयू, गोमती, रामगंगा
वन एवं राष्ट्रीय उद्यानदुधवा राष्ट्रीय उद्यान, किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य, नवाबगंज पक्षी अभयारण्य आदि
भाषाएँहिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, अवधी, भोजपुरी, बुन्देली, ब्रज आदि
पड़ोसी राज्यउत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार।
राजकीय पशुदलदली हिरण
राजकीय पक्षीसारस
राजकीय वृक्षसाल
राजकीय फूलपलाश
राजकीय नृत्यकथक
राजकीय खेलफील्ड हॉकी
नेट राज्य घरेलू उत्पाद (2011)26355
साक्षरता दर (2011)77.08%
1000 पुरुषों पर महिलायें908
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र403
संसदीय निर्वाचन क्षेत्र80